-वीर विनोद छाबड़ा
११
सितम्बर। जबसे अमरीका
के वर्ल्ड ट्रेड
सेंटर पर आतंकी
हमला हुआ है, ये
तारीख इसी याद
के लिए जानी
जाती है।
वरना
इससे पहले इस
तारीख को बंदे
की शहादत के
तौर पर याद
रखा जाता था।
उस पर श्रद्धा
सुमन चढाने वालों
का अल सुबह
से देर रात
तक तांता बंधा
रहता था। तेरह
साल हो गए।
कोई याद दिलाने
नहीं आया। चलो
अच्छा हुआ। फुरसत
मिली याद दिलाने
वालों से। मुफ़्तखोरों
पर होने वाला
खर्चा पानी बचा।
लेकिन
जाने क्यों बंदा
आज खुद को
बहुत तन्हा महसूस
कर रहा है।
दोस्तों रिश्तेदारों को
तो अपनी ही
मुसीबतों से फुरसत
नहीं। उन्हें क्या
याद होगा ये
दिन? कुछ तो ऊपर
ही चले गए
हैं। वहां से
भी अफ़सोस का
पैगाम नहीं आता।
सबसे
बड़ा अफ़सोस तो
ये है कि
पत्नी को भी
वो दिन याद
नहीं आता। हर
साल बंदा ही
याद कराता है।
बदले में वो
मुंह बिचका लेती
है। हिकारत से
देखती है। शायद
अफ़सोस करती रही
होगी कि काश
इस नाशुक्रे बंदे
के बदले उस
दिन कोई राजकुमार
सेहरा सजा के
आया होता तो
वो रानी होती
आज किसी स्टेट
की। बंदे पर
नास्टैल्जिया हावी
होने लगता है।
दिमाग के पर्दे
पर फ्लैशबैक चालू
हो गया है।
बंदे
को वो नज़ारा, वो 'मुबारक' घड़ी
याद आती है।
वो सज-धज
के पिताजी के
दोस्त कुलदीप सिंह
जी की कार
में बैठ कर
अपनी 'बैटर-हाफ' लेने के लिए
रवाना होता है।
दिन भर खूब
बारिश हुई है।
बंदे को फ़िक्र
लगी हुई है
बारात कैसे जाएगी?
लेकिन
बाकी सब बेफिक्र
हैं। जैसे सब
जानते हैं कि
शाम होते-होते
आसमान साफ़ हो
जायेगा। और वाकई
सब अंतरयामी निकले।
लेकिन सड़क पर
बेतरह कीचड है।
और उमस ज़बरदस्त।
सर पर साढ़े
सात किलो का
भारी भरकम चांदी
का मुकुट है।
इसे उसकी मां
चौक वाले किसी
पुजारिन से मांग
कर लायी है। और अपने
कद के बराबर
की तलवार भी
है। ये पड़ोस
के करतार सिंह
जी के घर
से आई है।
मगर
बंदे को ये
सब कतई अखर
नहीं रहा है।
उसे तो दुनिया
की सबसे बड़ी
नियामत जो हासिल
होने जा रही
है। अब ये
बात अलबत्ता दूसरी
है कि कुछ
ही दिनों में
रियालाइज़ हो गया
कि बैठे-बिठाये
एक इन्क्वायरी कमेटी
सर पे बैठा
ली, उम्र भर के
लिए।
बहरहाल
ठीक सात बजे
तक़रीबन ३०० मित्रो-रिश्तेदारों का जुलूस
बैंड -बाजे और पंजाबी
ढोल की बेसुरी
धुनों पर नाचते-गाते
और झूमते हुए
धीरे-धीरे आगे बढ़ता
है।
आज
सभी नशे में
हैं। सबके नशे
अलग-अलग हैं। कोई
शुभ अवसर के
नशे में चूर
है तो कोई
बोतल के। और
किसी किसी को
नाचने का नशा
है। कोई कोई
तो इन सबको
देख कर मस्त
है।