Wednesday, July 26, 2017

इक हसीं ख्वाब।

- वीर विनोद छाबड़ा 
कल दोपहर खाना खाने के बाद जो नींद आयी तो शाम को ही टूटी। टूटी नहीं बल्कि तोड़ी गयी। मेमसाब 'चाय चाय' करती हुईं आयीं और एक झटके में तोड़ कर गयीं। कोई हसीन ख्वाब देख रहे थे। यूं तो 75% ख्वाब मेमोरी से गायब हो जाते हैं और बचे हुए दो घंटे बाद वाश आउट। लेकिन अपवाद स्वरूप कुछ मष्तिष्क पटल पर टिके रह जाते हैं। कल वाला ख़्वाब भी कुछ ऐसा ही था। 
हुआ यों कि मंदिर के प्रांगढ़ से हमारा नया नया स्पोर्ट्स शू चोरी हो गया था। हे भगवान! तेरे दर पर ये कैसा अंधरे। भक्त भी चोर हो गए। हमने पुलिस थाने में रपट लिखाई। अभी हम थाने से बाहर निकले ही थे कि पुलिस ने चोर को पकड़ लिया। 
हमें हैरानी हुई कि लाखों-करोड़ों की चोरी तो पुलिस सॉल्व नहीं कर पाती, हमारा 809 रूपए वाले जूता चोर को कैसे पुलिस ने आधे घंटे में धर दबोचा? इतना इंटरेस्ट लेने की वजह भी समझ में नहीं आयी। हैरानी तो और भी बढ़ी जब देखा कि वो जूता चोर, चोर नहीं, चोरनी है। बाकायदा कसी जींस और टी शर्ट से लैस। 
दरोगा जी बड़े जोश में जोर जोर से ज़मीन पर डंडा और पैर फटका रहे थे। अब यह भी बता दें कि कल कप्तान साहब की मेमसाब के जो सैंडिल चुराये थे वो कहां हैं? दरोगा जी ने लड़की से उसका मोबाईल भी छीन लिया लिया था। 
अब हमारी समझ में आया कि जूता चोरी के मामले में दरोगा जी का बढ़-चढ़ कर इंटरेस्ट लेने का कारण। तलाश तो किसी सैंडिल की थी और हाथ में आया हमारा जूता। 
वो लड़की बार बार कह रही थी कि उसने जूता चोरी नहीं किया है, यह जूते उसी के हैं। आजकल लेडीज़ भी जेंट्स जैसे जूते पहनती हैं। चाहो तो हमारे पापा से पूछ लो। हमारा मोबाईल वापस करो। हम उनसे बात करा देते हैं। या आप खुद बात कर लें। उनका मोबाईल नंबर है.....। 
दरोगा जी ने बड़ी कातिल अंदाज़ में लड़की को घूरा और गालियों के बादशाह को भी शर्मिंदा करती हुई एक साथ कई मोटी गालियां की बौछार कर दी। फिर मूंछों पर ताव देते हुए गुर्राए  - हां, हां। क्यों नहीं। अभी तुम्हारे बाप को बुलाया है। आ ही रहे हैं। दोनों बाप-बेटी को अंदर न कराया तो मूंछ मुड़ा दूंगा। 
तभी एक नीली बत्ती वाली कार भन्न से आकर रुकी। सिपाही ने इतल्ला दी - सर, कप्तान साहब हैं। 
दरोगा जी ने फ़ौरन सर पर कैप रखी, कॉलर ठीक किया और एक लंबा सलूट मारा। इतने में वो चोरनी कप्तान साहब को देखते ही 'पापा पापा' कहती हुई लिपट गयी। दरोगा जी के पैरों तले से ज़मीन ही खिसक गयी। कभी दायें देखें और तो कभी बायें। और कप्तान साहब थे कि बेटी की आंख से आंसू पोंछते हुए दरोगा साहब को बस घूरते ही जा रहे थे। 
अब ऐसे माहौल में हमने बेहतर यही समझा कि अपना जूता भूल जाओ। और हमने यही किया। 
नोट - हमारा सपना तो वहीं टूट गया था जब जूता चोरी के आरोप में एक हसीन लड़की पकड़ी गयी। अब लड़की इतनी हसीन थी तो सोचा कि इस सपने को एक हसीन मोड़ दे कर ख़तम करना बेहतर। 
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२६-०७-२०१६

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