-वीर विनोद छाबरा
हमारे एक अस्सी वर्षीय मित्र को खराब लगा जब एक सोसाइटी ने एक हमारे ८२ वर्षीय मित्र को न सिर्फ वयोवृद्ध घोषित किया गया बल्कि इसी नाते बाक़ायदा सम्मानित भी कर दिया। उन्हें बहुत खराब भी लगा। हम होते तो हमें भी बेहद बुरा लगता। भाड़ में सम्मान /
मित्र कहते हैं जब तक चलने और सोचने की शक्ति है। विचारों से भी प्रगतिशील हूं, तब तक मैं वयोवृद्ध कहलाना पसंद नहीं चाहूंगा । इस सम्मान को ससस्मान वापस करना चाहता हूं।
मैं ठीक उनकी ही तरह के विचार रखता हूं। हालांकि बस में नहीं चल सकता। लेकिन मौका मिला तो चल भी सकता हूं।
लेकिन इंसल्ट पसंद नहीं करता। गुस्सा आता है। कैसी पीढ़ी? सीनियर का सम्मान नहीं करती। कल एक नेशनल बैंक की ब्रांच में खड़ा था। शायद उस समय सबसे सीनियर मैं ही था। किसी ने बैठने के लिए सीट ऑफर नहीं की। काउंटर पर बैठी एक लड़की, जो अपने व्यवहार से ऑफिसर रैंक की थी। क्योंकि उस समय वो सबसे ज्यादा एक्टिव और हेल्पफुल थी। उसने मुझसे कहा - अंकल आप जाएँ, आपका काम हो जाएगा। शाम तक आपके अकाउंट के पैसा पहुँच चाहेगा। बाहर मौसम बहुत ख़राब हो रहा है।
मैंने कहा - थैंक्यू मेडम, मौसम तो ख़राब हो चुका है। मेरे पास कार है, थोड़ा भीग ही जाऊंगा। कोई ग़म नहीं। आप नहीं जानती कि यह काम कितना ज़रूरी है। मेरे सामने बेटी के अकाउंट में पैसा ट्रांसफर हो जाएगा तो इत्मीनान हो ज्यादा हो। मैं उम्र के उस पड़ाव पर हूं कि कब क्या हो जाए, कुछ पता नहीं?
हमारी बात सुन रहा एक जवान उठा। सर, आप बैठें कृपया।
हमने ना-नुकुर की।
उसने हमें ज़बरदस्ती बैठा दिय। दस मिनट हुए थे, हमें बैठे हुए कि बैंक वाली मैडम ने सूचित किया कि पैसा अकाउंट में ट्रांसफर हो गया।
हमें चैन मिला। ऊपर वाले तेरा लाख लाख शुक्रिया। सही समय पर पैसा मेरी बेटी आकउंट में ट्रांसफर हो गया। हम कम्प्यूटर युग को इसीलिए बहुत शुक्रिया कहते हैं। हफ़्तों का काम चुटकियों में होता है। अन्यथा एक टेबुल से दूसरी टेबुल पर फाइल उठा कर रखने में चपरासी हफ्ता भर ले लिया करता है।
हमारे एक अस्सी वर्षीय मित्र को खराब लगा जब एक सोसाइटी ने एक हमारे ८२ वर्षीय मित्र को न सिर्फ वयोवृद्ध घोषित किया गया बल्कि इसी नाते बाक़ायदा सम्मानित भी कर दिया। उन्हें बहुत खराब भी लगा। हम होते तो हमें भी बेहद बुरा लगता। भाड़ में सम्मान /
मित्र कहते हैं जब तक चलने और सोचने की शक्ति है। विचारों से भी प्रगतिशील हूं, तब तक मैं वयोवृद्ध कहलाना पसंद नहीं चाहूंगा । इस सम्मान को ससस्मान वापस करना चाहता हूं।
मैं ठीक उनकी ही तरह के विचार रखता हूं। हालांकि बस में नहीं चल सकता। लेकिन मौका मिला तो चल भी सकता हूं।
लेकिन इंसल्ट पसंद नहीं करता। गुस्सा आता है। कैसी पीढ़ी? सीनियर का सम्मान नहीं करती। कल एक नेशनल बैंक की ब्रांच में खड़ा था। शायद उस समय सबसे सीनियर मैं ही था। किसी ने बैठने के लिए सीट ऑफर नहीं की। काउंटर पर बैठी एक लड़की, जो अपने व्यवहार से ऑफिसर रैंक की थी। क्योंकि उस समय वो सबसे ज्यादा एक्टिव और हेल्पफुल थी। उसने मुझसे कहा - अंकल आप जाएँ, आपका काम हो जाएगा। शाम तक आपके अकाउंट के पैसा पहुँच चाहेगा। बाहर मौसम बहुत ख़राब हो रहा है।
मैंने कहा - थैंक्यू मेडम, मौसम तो ख़राब हो चुका है। मेरे पास कार है, थोड़ा भीग ही जाऊंगा। कोई ग़म नहीं। आप नहीं जानती कि यह काम कितना ज़रूरी है। मेरे सामने बेटी के अकाउंट में पैसा ट्रांसफर हो जाएगा तो इत्मीनान हो ज्यादा हो। मैं उम्र के उस पड़ाव पर हूं कि कब क्या हो जाए, कुछ पता नहीं?
हमारी बात सुन रहा एक जवान उठा। सर, आप बैठें कृपया।
हमने ना-नुकुर की।
उसने हमें ज़बरदस्ती बैठा दिय। दस मिनट हुए थे, हमें बैठे हुए कि बैंक वाली मैडम ने सूचित किया कि पैसा अकाउंट में ट्रांसफर हो गया।
हमें चैन मिला। ऊपर वाले तेरा लाख लाख शुक्रिया। सही समय पर पैसा मेरी बेटी आकउंट में ट्रांसफर हो गया। हम कम्प्यूटर युग को इसीलिए बहुत शुक्रिया कहते हैं। हफ़्तों का काम चुटकियों में होता है। अन्यथा एक टेबुल से दूसरी टेबुल पर फाइल उठा कर रखने में चपरासी हफ्ता भर ले लिया करता है।





