वीर विनोद छाबड़ा
उस दिन सुबह जब मुरादाबाद की सुमन सोकर उठी तो उसे नहीं मालूम था कि ये उसकी ज़िंदगी का आख़िरी दिन साबित होगा।
मुरादाबाद शहर के एक एरिया की पिछले चार बरस से निर्माणाधीन सीवर लाइन के मेनहोल की पिट खुली रह गई है। इस कार्य को संपन्न करने वाली कंपनी की लापरवाही का नमूना था ये।
न जाने क्या हुआ कि सुमन बरास्ता खुले मेनहोल सीवर में गिर जाती है।
वो जान बचाने की गुहार लगाती है- बचाओ बचाओ।
कई लोग भाग कर आगे आते हैं।
मगर इस भीड़ में जांबाज़ सिर्फ दो ही निकलते हैं। नोमान और दानिश।
वो बरास्ता मेनहोल सीवर में कूद जाते हैं।
उन्हें नहीं मालूम वो एक बहुत खतरनाक काम अंजाम देने जा रहे हैं। इसमें जान भी जा सकती है।
और वही हुआ जिसका डर था।

