-वीर विनोद छाबड़ा
निर्माता-निर्देशक
महबूब खान ने १९५४ एक बड़ी सनसनी पैदा की। 'अमर' में मशहूर अभिनेता
दिलीप कुमार के सामने एक नहीं दो मशहूर नायिकाएं लेने का ऐलान किया - मधुबाला और निम्मी।
दोनों पहली बार आमने-सामने। परदे के बाहर इनकी हाय-हेल्लो भी नहीं थी। अब चूंकि दोनों
साथ साथ काम कर रही थीं तो मुस्कुराहटों का आदान-प्रदान तो होना ही था।
अदाकारी के मामले में
निम्मी एक हाथ आगे थी मधुबाला से। दिलीप कुमार बहुत तारीफ़ भी किया करते थे। मधु ने
किसी से सुना था कि मीना कुमारी को हटा कर निम्मी को लाया गया है और इसके पीछे हाथ
युसूफ का है। मधुबाला को शक़ हुआ कि युसूफ के दिल में कोई और तो नहीं। मर्द जात है,
जाने किधर फिसल जाये।
एक दिन एक डांस की
शूट चल रही थी। निम्मी डांस कर रही थी और दिलीप और मधु देख रहे हैं। निम्मी की स्टेपिंग
ग़लत हो गयी। मधु की हंसी छूट गयी। निम्मी को बहुत गुस्सा आया। वो सेट छोड़ कर चली गयीं।
जिद्द पकड़ कर बैठ गयी कि जब तक मधु है, मैं सेट पर नहीं आऊंगी।
दिलीप कुमार के कहने
पर आखिर मधु ही गयी निम्मी को समझाने। हंसना तो मेरी आदत है।
और निम्मी मान गयी।
उस दिन के बाद से दोनों बहुत ही अच्छी सहेलियां बन गयी। अपने दुःख-सुख भी शेयर करने
लगीं। दोनों की बातचीत के ज्यादा हिस्से में दिलीप कुमार ही होते थे। मधु अक्सर निम्मी
के दिल को टटोलने की कोशिश करती थी कि कहीं युसूफ तो नहीं बैठे वहां? ऐसा सोचने की वज़ह भी
थी। निम्मी इससे पहले दिलीप कुमार के साथ 'दीदार' और 'आन' में काम कर चुकी थी
और वर्तमान में 'उड़न खटोला' में भी काम कर रही थी। वो दिलीप कुमार से
बिंदास बात करती थी, हंसी-ठठ्ठा भी होता था। लंच लिया कि नहीं? कुछ थके थके से दिखते
हैं। कहिये, तो सर दबा दूं? स्टूडियो के डॉक्टर
से मशविरा कर लें। मधु को निम्मी का युसूफ के प्रति यह अतिरिक्त अपनापन अखरता था।
मधु के दिल और दिमाग
को ये नज़ारे जैसे हथौड़ा मारते थे। क्यों युसूफ का कुछ ज्यादा ही ख्याल रख रही है ये
निगोड़ी निम्मी? एक-आध दिन की बात हो तो बर्दाश्त कर लूं। मगर ये मुई तो हाथ
धो कर पीछे ही पड़ गयी है। जल्दी ही बात करनी पड़ेगी। ऐसा न पानी सर से ऊपर निकल जाए।
आख़िर एक दिन अकेले
में मधु ने पकड़ ही लिया निम्मी को। बहन, एक बात कहूं,
बुरा न मानना। सच-सच बताना। क्या तुम भी उनको चाहती हो जिसे मैं चाहती हूं?
तुममे और युसूफ में कुछ चल रहा है क्या? तुम हां कहो। मैं तुम्हारे
रास्ते से हट जाऊंगी। कट जायेगी जुबां मेरी अगर भूले से भी उनका नाम आया। यह कहते हुए
मधु ने निम्मी के कांधे पर सर रख दिया और कर फूट-फूट कर रो पड़ी।
निम्मी के सर पर पहाड़
गिरा हो जैसे। वो सकते में आ गयी। अल्लाह, ये कैसी बात कर रही
है? उसने मधु की ठुड्डी ऊपर उठाई। आंखों से आंसू पोंछे। पागल हो गयी लगती है। तू तो
बहुत खूबसूरत है। मुझे तेरे और उसके बीच का सारा हाल मालूम है। वो तेरा है और तेरा
ही रहेगा। और फिर मुझे खैरात में मोहब्बत नहीं चाहिए।
निम्मी ने एक और हिदायत
दी। हां, ध्यान में रखना एक बात और। जैसा ऑफर तूने मुझे दिया है वैसा
किसी और को न देना। अगर वो मेरी तरह दरियादिल न हुई तो तू खाली हाथ रह जायेगी।
मधु और दिलीप की प्रेम
कहानी अंजाम तक नहीं पहुंची। मधु कब्रगाह में आराम फ़रमा रही हैं। निम्मी ने संवाद लेखक
अली रज़ा से शादी कर ली। इस वक्त वो ८३ साल की हैं और बेवा की ज़िंदगी जी रही हैं।
---
Published in Navodaya Times dated 20 Aug 2016
---
D-2290 Indira Nagar
Lucknow - 226016
mob 7505663626
No comments:
Post a Comment